शुक्रवार, 26 जून 2015

मित्रों , ' व्यंग्य यात्रा ' का 43 वां अंक - 'राग व्यंग्य विमर्श ' प्रेस में चला गया है। इसका मुख्य कवर प्रसिद्द चित्रकार एवं कवि ,केनेडा निवासी , मंजीत चात्रिक की कलाकृति पर आधारित है।
इस अंक में
पाथेय में: 
गोपालप्रसाद व्यास पर रामशरण जोशी, कैलाश वाजपेयी पर दिविक रमेश,
कृष्णदत्त पालीवाल पर हरीश नवल एवं अवधनारायण मुद्गल पर महेश दर्पण
चिंतन मेंः
व्यंग्य तज़मीन - निर्मिश ठाकर। ‘व्यंग्य का मेरा सच’ शिवशंकर मिश्र
जबलपुर में राग व्यंग्य विमर्श
कुंदनसिंह परिहार, रमेश सैनी,रमाकांत ताम्रकर, श्रीकांत चौधरी , संतोष खरे
गंगाचरण मिश्र, आचार्य भागवत दुबे,श्रीराम ठाकुर दादा, अनामिका तिवारी
रामानुज लाल श्रीवास्तव,उपेन्द्र शर्मा,अभिमन्यु जैन,मनोज कुमार शुक्ल ‘मनोज’ प्रभात दुबे,
साध्ना उपाध्याय, सुधरानी श्रीवास्तव, कुंवर प्रेमिल, गुप्तेश्वर द्वारका गुप्त, -विवेक रंजन श्रीवास्तव
त्रिकोणीय में ज्ञान चतुर्वेदी का
व्यंग्य उपन्यास ‘हम न मरब’
प्रभाकर श्रोत्रिय, प्रेम जनमेजय,दिलीप तेतरवे एवं विवेक मिश्र
गद्य व्यंग्य रचनाएं में
शंकर पुणतांबेकर, हरि जोशी, वेदप्रकाश अमिताभ,श्रवण कुमार उमर्लिया, उर्मि कृष्ण
प्रदीप चैबे, मधुसूदन पाटिल, असीम कुमार आंसू, अकबर रिजवी,अलका अग्रवाल सिगतिया,
सुधेश, सुरेश धींगड़ा रामदेव धुरंधर, सूर्यकुमार पांडेय, रामबहादुर चैधरी ‘चंदन’, अभिषेक अवस्थी,
कुलविन्दर सिंह कंग, इन्द्रजीत कौर, मंगल कुलजिन्द, शरद तैलंग, रमाकांत शर्मा, -प्रदीप शशांक
सुभाष काबरा, संजीव निगम, प्रहलाद श्रीमाली, ओमप्रकाश सारस्वत, नीलाभ कुमार, अम्बिका दत्त आदि
पद्य व्यंग्य रचनाएं में
राजरारायण बिसारिया, नरेश शांडिल्य, प्रेमशंकर रघुवंशी, मनोहर पुरी सुभाष रस्तोगी, जयगोपाल मदान
प्राण शर्मा, शिवानंद सहयोगी आरती स्मित, पं. गिरिमोहन गुरू, लोक सेतिया
इधर जो मैंने पढ़ा में
विभारानी, कुलदीप तलवार, सुनीता शानू की कृतियों पर प्रेम जनमेजय एवं सुशील सिद्धार्थ

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